सनातन हिंदू धर्म संस्कृति में श्रावण मास (सावन का महीना) वर्ष का सबसे पवित्र और फलदायी महीना माना जाता है। यह पूरा महीना देवाधिदेव महादेव शिवशंकर की पूजा और आराधना के लिए अत्यंत विशेष है।
पौराणिक महत्व और समुद्र मंथन कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब भीषण ‘हलाहल’ विष निकला, तो सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष की ज्वाला को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल का अभिषेक किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की पवित्र परंपरा प्रारंभ हुई।
सावन सोमवार व्रत का महत्व
सावन के सोमवार का व्रत करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अनविवाहितों को योग्य जीवनसाथी मिलता है और परिवारों में सुख-समृद्धि आती है।
शिव पूजन विधि और बेलपत्र
सावन में शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, शहद और त्रिदल बेलपत्र अर्पित करने से सभी पापों का नाश होता है। “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत कल्याणकारी है।
उपसंहार
2026 के इस पवित्र सावन मास में श्रद्धापूर्वक भगवान भोलेनाथ की भक्ति कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। हर हर महादेव!