एक व्यापारी का संजीवक नाम का बैल जंगल के रास्ते में कीचड़ में फँस गया। व्यापारी उसे वहीं छोड़कर चला गया। संजीवक बैल धीरे-धीरे कीचड़ से निकलकर जंगल की हरी घास खाकर बहुत ही तंदुरुस्त और मज़बूत बन गया। वह आनंद में आकर ज़ोर-ज़ोर से रंभाता था।
जंगल का राजा पिंगलक शेर उसकी बुलंद गर्जना सुनकर किसी अज्ञात प्राणी से डर गया। शेर के दो मंत्री सियार थे — दमनक और करटक। दमनक ने बैल के पास जाकर उसे शेर का मित्र बना दिया। शेर और बैल के बीच अद्भुत मित्रता हो गई और शेर ने शिकार करना भी कम कर दिया।
यह देखकर चालाक सियार दमनक को लगा कि उसका प्रभाव कम हो रहा है। उसने शेर के कान में कहा, “महाराज! संजीवक बैल आपका सिंहासन छीनना चाहता है।” फिर वह बैल के पास गया और बोला, “शेर तुम्हें मार डालने की योजना बना रहा है।”
दोनों मित्र कानों के कच्चे निकले और एक-दूसरे पर अविश्वास करने लगे। दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ जिसमें संजीवक बैल मारा गया। बाद में शेर को पछतावा हुआ, लेकिन सियार अपनी तरकीब में सफ़ल हो गया।