एक गरीब गाँव में एक औरत अपनी दो बेटियों के साथ रहती थी।
उनकी गरीबी देखकर एक ‘सुनहरा हंस’ आया और उसने हर हफ्ते सोने का एक पंख देने का वादा किया।
हंस के पंखों से परिवार की गरीबी दूर हो गई।
लेकिन औरत के मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि एक ही बार में सारे पंख उखाड़ ले।
जब हंस आया, तो औरत ने जबरन सारे पंख उखाड़ लिए। पर वे सारे पंख सामान्य मुर्गियों के पंख बन गए!
हंस ने कहा, “तुम्हारे लालच ने सब नष्ट कर दिया।”
यह कहानी सिखाती है कि लालच का फल हमेशा बुरा होता है।
अति लालच और संतोष का अमर संदेश:
सुनहरे हंस और लालची औरत की यह जातक कथा बच्चों को सिखाती है कि लालच का फल हमेशा बुरा होता है। यदि उस औरत ने संतोष रखा होता, तो उसे हर हफ्ते सोने का पंख मिलता रहता। पर अत्यधिक लालच के चक्कर में उसने हंस का विश्वास और सोने के पंख दोनों खो दिए। हमारे पास जो है, उसमें संतोष रखना ही सुखी जीवन की कुंजी है।
कहानी की मुख्य सीख और जीवन मूल्य:
1. कभी भी सत्य और ईमानदारी का मार्ग न छोड़ें।
2. विपत्ति के समय धैर्य, शांति और विवेक से काम लें।
3. दूसरों के दुख में सहानुभूति दिखाएं और यथासंभव मदद करें।
4. समय का आदर करें और आलस त्यागकर कठिन परिश्रम करें।
5. संकट के समय एकता और आपसी सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
कहानी का नैतिक और मानसिक संदेश:
यह पवित्र और शिक्षाप्रद कहानी बच्चों के मानसिक और नैतिक विकास में अद्भुत संस्कारों का सिंचन करती है। जब मन में सत्य, ईमानदारी, धैर्य, विनय और साहस जैसे सद्गुण होते हैं, तो जीवन की हर कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने का सुंदर मार्ग अपने आप मिल जाता है। सज्जनता, परोपकार, नम्रता और प्रभु-भक्ति ही हमारी सच्ची संपत्ति है। हर बच्चे को ऐसी सुंदर कहानियाँ पढ़कर अपने जीवन को सुंदर और उज्ज्वल बनाना चाहिए।
जब बच्चे ऐसी दिव्य और प्रेरणादायक बाल कहानियों का पठन करते हैं, तो उनके जीवन में उत्साह, सदाचार, चरित्र और ईमानदारी का नया सूर्योदय होता है। माता-पिता और गुरुजनों का आदर करना तथा सत्कर्म का मार्ग अपनाना ही मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य है। ईमानदारी से किया गया छोटा सा कार्य भी ईश्वर के दरबार में अनमोल बन जाता है। सत्यता और धैर्य हमें समाज में उच्च स्थान प्रदान करते हैं।