भारत के स्वतंत्रता संग्राम और अखंड भारत के निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान अतुलनीय है। उनके दृढ़ मनोबल, निर्भीकता और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के कारण पूरा देश उन्हें “सरदार” और “लौह पुरुष” के रूप में याद करता है।
बचपन और बैरिस्टरी
सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नडियाद, गुजरात में हुआ था। उनके पिता झवेरभाई और माता लाडबाई थीं। इंग्लैंड से बैरिस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण कर वे एक सफल वकील बने।
बारडोली सत्याग्रह और “सरदार” उपाधि
1928 में बारडोली के किसानों पर अंग्रेजों द्वारा बढ़ाए गए लगान के खिलाफ उन्होंने ऐतिहासिक किसान आंदोलन का सफल नेतृत्व किया। बारडोली की महिलाओं और गांधी जी ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी।
562 रियासतों का एकीकरण (अखंड भारत)
स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उन्होंने 562 से अधिक देसी रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराया और अखंड भारत की स्थापना की।
उपसंहार
15 दिसंबर 1950 को उनका निधन हुआ। उनकी याद में 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। गुजरात में उनकी 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी उनकी अमर कीर्ति का प्रतीक है।