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साहसी नन्हा दर्जी और डर का दानव (The Brave Tailor and Giant of Fear)

🎭 મુખ્ય પાત્રો: मोहन दर्जी, विशाल दानव

साहसी नन्हा दर्जी और डर का दानव (The Brave Tailor and Giant of Fear)
અક્ષરનું માપ:

एक छोटे और सुंदर नगर में ‘मोहन’ नाम का एक नन्हा दर्जी रहता था। मोहन आकार में दुबला-पतला था, लेकिन उसका दिमाग बहुत ही तेज़, चतुर और हाजिरजवाब था। मोहन कपड़े सीने में इतना कुशल था कि पूरे नगर के लोग उसके काम की बहुत तारीफ करते थे।

एक बार नगर के पीछे स्थित काले पहाड़ों से एक भयानक और विशालकाय दानव नीचे उतर आया। वह दानव बहुत ही घमंडी और क्रोधी था। वह नगर के लोगों को डराता, उनके खेतों को तहस-नहस कर देता और अपनी भयानक दहाड़ से पूरे नगर में खौफ फैला देता था। राजा के बड़े-बड़े पहलवान और योद्धा भी उस दानव के विशाल शरीर को देखकर डर के मारे छिप गए।

मोहन दर्जी ने सोचा कि केवल आकार बड़ा होने से कोई पहलवान नहीं बन जाता। बुद्धि के सामने बड़े-बड़े दानव भी घुटने टेक देते हैं। मोहन ने अपनी जेब में सुई-धागा, थोड़ा सा पनीर का टुकड़ा और एक छोटी जीवित चिड़िया रखी और अकेला दानव का सामना करने पहाड़ की ओर चल पड़ा।

जब दानव ने छोटे से मोहन को अपनी ओर आते देखा, तो वह ठहाका मारकर हँसा, “अरे छोटे कीड़े! तुम मुझसे लड़ने आए हो? मैं तुम्हें अपनी एक उंगली से मसल दूँगा!”

मोहन ने बिना डरे मुस्कुराकर कहा, “अरे दानव भाई! तुम्हारे पास केवल शरीर की ताकत है, लेकिन मेरे पास अद्भुत शक्तियाँ हैं। क्या तुम मुझसे ताकत का मुकाबला करने को तैयार हो?”

दानव ने गर्व से ज़मीन से एक बड़ा पत्थर उठाया और अपनी मुट्ठी में इतनी ज़ोर से दबाया कि पत्थर से पानी की एक बूँद निचोड़ दी। दानव ने कहा, “क्या तुम इस पत्थर से पानी निकाल सकते हो?”

मोहन ने तुरंत अपनी जेब से सफ़ेद पनीर का टुकड़ा निकाला और मुट्ठी में पत्थर छिपाने का नाटक करते हुए पनीर को ऐसा दबाया कि उसमें से ढेर सारा पानी टपकने लगा! दानव यह देखकर हैरान रह गया!

इसके बाद दानव ने एक दूसरा पत्थर उठाया और उसे आसमान की ओर बहुत ऊँचा फेंका। पत्थर थोड़ी देर बाद ज़मीन पर वापस गिर गया। दानव ने कहा, “अब इस पत्थर को आसमान में फेंककर दिखाओ!”

मोहन ने अपनी जेब से नन्ही चिड़िया निकाली और हाथ ऊपर करके चिड़िया को आसमान की ओर उड़ा दिया! चिड़िया आसमान में दूर उड़ गई और वापस ज़मीन पर आई ही नहीं! मोहन ने कहा, “देखो! मेरा पत्थर तो आसमान में ही रुक गया, वापस आया ही नहीं!”

दानव मोहन की इस चतुर चाल से बुरी तरह डर गया! उसने सोचा कि यह छोटा इंसान कोई बहुत बड़ा जादूगर है जो पत्थर से पानी निकाल सकता है और पत्थर को गायब कर सकता है। दानव अपनी जान बचाकर पहाड़ की ओर भाग गया और फिर कभी नगर में वापस नहीं आया!

पूरे नगर में मोहन दर्जी की बुद्धिमत्ता और साहस की जय-जयकार होने लगी।

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વાર્તાનો બોધ (Moral of the Story)

डर का सही मुकाबला बुद्धि और साहस से होता है; शारीरिक बल से बुद्धिबल हमेशा श्रेष्ठ होता है।