एक ऊँचे पर्वत पर गरुड़ नाम का एक शक्तिशाली बाज़ रहता था। गरुड़ को अपने विशाल पंखों और ऊँची उड़ान पर बहुत घमंड था। वह छोटे पक्षियों का मज़ाक उड़ाता था।
उसी पर्वत की तलहटी में एक छोटी सुंदर हमिंगबर्ड रहती थी। हमिंगबर्ड का कद बहुत छोटा था लेकिन वह बहुत हिम्मतवाली थी।
एक दिन पर्वत के जंगल में भीषण आग लग गई। सभी बड़े पक्षी घबराकर भागने लगे। लेकिन छोटी हमिंगबर्ड अपनी छोटी चोंच में तालाब से पानी की बूँदें भर-भरकर आग पर डालने लगी। बाज़ ने हँसकर कहा, ‘तुम्हारी एक-दो बूँदों से यह आग थोड़ी बुझने वाली है?’ हमिंगबर्ड ने शांति से उत्तर दिया, ‘मैं परिणाम नहीं देख रही, मैं अपना कर्तव्य और प्रयास कर रही हूँ!’ हमिंगबर्ड की यह हिम्मत देखकर अन्य जानवर भी पानी छिड़कने लगे और आग बुझ गई। बाज़ का घमंड चूर-चूर हो गया।