બાળ કવિતા

खीर खाने आई बिल्ली (Khir Khane Aai Billi)

खीर खाने आई बिल्ली रानी,
दूध पी गई चुपके से सयानी!

म्याऊँ-म्याऊँ करती प्यारी,
चूहा देख दौड़ी फटाफट न्यारी!

नरम-नरम हैं इसके पाँव,
घर में घूमे बड़ी ही ठाठ!

बिल्ली मौसी हमको भाए,
दूध बचाकर फिर भी रख जाएँ!

खीर खाने आई बिल्ली (Khir Khane Aai Billi)