एक जंगल में ‘चीकू’ नाम का स्वार्थी बंदर रहता था जो आम के पेड़ के फल किसी को खाने नहीं देता था।
उसी जंगल में ‘गजराज’ नाम का दयालु हाथी रहता था।
एक दिन चीकू शिकारियों के गहरे गड्ढे में गिर गया। उसके बुरे व्यवहार के कारण कोई जानवर मदद को नहीं आया।
तब दयालु गजराज हाथी ने अपनी सूँड से चीकू को बाहर निकालकर बचा लिया।
चीकू को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह स्वार्थ छोड़कर सबके साथ मिल-जुलकर रहने लगा।
यह कहानी सिखाती है कि दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
स्वार्थ त्याग और परोपकार की महिमा:
स्वार्थी बंदर और दयालु हाथी की यह पंचतंत्र कथा बच्चों को सिखाती है कि केवल अपने स्वार्थ के लिए जीने वाला व्यक्ति अकेला पड़ जाता है। परोपकारी और दयालु इंसान ही समाज में आदर और प्रेम पाता है। दूसरों की मदद करना और अपनी चीज़ें बाँटकर जीना ही सच्चे सुख का मार्ग है।
कहानी की मुख्य सीख और जीवन मूल्य:
1. कभी भी सत्य और ईमानदारी का मार्ग न छोड़ें।
2. विपत्ति के समय धैर्य, शांति और विवेक से काम लें।
3. दूसरों के दुख में सहानुभूति दिखाएं और यथासंभव मदद करें।
4. समय का आदर करें और आलस त्यागकर कठिन परिश्रम करें।
5. संकट के समय एकता और आपसी सहयोग ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
कहानी का नैतिक और मानसिक संदेश:
यह पवित्र और शिक्षाप्रद कहानी बच्चों के मानसिक और नैतिक विकास में अद्भुत संस्कारों का सिंचन करती है। जब मन में सत्य, ईमानदारी, धैर्य, विनय और साहस जैसे सद्गुण होते हैं, तो जीवन की हर कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने का सुंदर मार्ग अपने आप मिल जाता है। सज्जनता, परोपकार, नम्रता और प्रभु-भक्ति ही हमारी सच्ची संपत्ति है। हर बच्चे को ऐसी सुंदर कहानियाँ पढ़कर अपने जीवन को सुंदर और उज्ज्वल बनाना चाहिए।
जब बच्चे ऐसी दिव्य और प्रेरणादायक बाल कहानियों का पठन करते हैं, तो उनके जीवन में उत्साह, सदाचार, चरित्र और ईमानदारी का नया सूर्योदय होता है। माता-पिता और गुरुजनों का आदर करना तथा सत्कर्म का मार्ग अपनाना ही मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य है। ईमानदारी से किया गया छोटा सा कार्य भी ईश्वर के दरबार में अनमोल बन जाता है। सत्यता और धैर्य हमें समाज में उच्च स्थान प्रदान करते हैं।